अवैध उत्खनन करने वाले रेत माफिया ने नर्मदा के किनारों को छलनी करते-करते अपने कामकाज को इस इलेक्ट्रिक ग्रिड के ठीक पास तक पहुंचा दिया है। अब हालत यह हो गई है कि इस अवैध उत्खनन के कारण किसी भी दिन नर्मदा योजना का इलेक्ट्रिक ग्रिड पूरी तरह से धंस जाएगा।

इंदौर में जल प्रदाय बंद हो जाने की आशंका



इंदौर । किसी भी दिन इंदौर शहर में बूंद-बूंद पानी के लिए संकट पैदा होने जैसे हालात बन सकते हैं। यह हालात नर्मदा नदी में किए जा रहे अवैध उत्खनन के कारण पैदा होने का खतरा पैदा हो गया है। जलूद में जहां नर्मदा पेयजल योजना की इलेक्ट्रिक ग्रिड बनी हुई है उसके पास तक अवैध उत्खनन होना शुरू हो गया है।
इंदौर शहर पानी के लिए पूरी तरह से नर्मदा नदी पर निर्भर है, यदि नर्मदा का पानी नहीं आए तो शहर में वैसे ही पानी का संकट पैदा हो जाता है। ऐसे में अब इंदौर के सामने एक बड़ा खतरा मंडराता हुआ नजर आ रहा है। यह खतरा नर्मदा नदी से मिलने वाले पानी को लेकर है। दरअसल प्रदेश में सरकार कोई भी हो नर्मदा के किनारे अवैध उत्खनन तो धड़ल्ले के साथ चल रहा है। प्रदेश की पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रदेश में अवैध उत्खनन का कीर्तिमान स्थापित करने का काम किया गया था। उस समय नर्मदा नदी को छलनी-छलनी करते हुए उसके किनारों से उत्खनन कर रेत माफियों ने अपनी तिजोरी भरने में कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी थी। जब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और कांग्रेस की कमलनाथ नेतृत्व वाली सरकार काबिज हुई तो उसके बाद उम्मीद थी कि रेत माफिया पर शिकंजा कसा जाएगा। नर्मदा नदी को छलनी करने का दौर थम जाएगा। नदियों के किनारों को सुरक्षित और संरक्षित कर लिया जाएगा। यह उम्मीदें भी अब दम तोड़ती हुई नजर आ रही है। सरकार की ओर से अवैध उत्खनन को रोकने की दिशा में ऐसा कोई काम नहीं किया जा रहा है, जिससे कि नदियों को बचाया जा सके।


प्रदेश में जीवन दायिनी नर्मदा नदी भी इस अवैध उत्खनन की शिकार है। पूरे प्रदेश में नर्मदा के किनारे जमकर अवैध उत्खनन हो रहा है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जब नर्मदा परिक्रमा की थी तब उन्होंने नर्मदा के किनारे हुए अवैध उत्खनन से उपजे हालात को खुद अपनी आंखों से देख लिया था। इसी कारण ज्यादा उम्मीद थी कि वे कम से कम हस्तक्षेप करते हुए नर्मदा को छलनी होने से बचा लेंगे, लेकिन अफसोस कांग्रेस की सरकार के कार्यकाल में भी ऐसा नहीं हो पा रहा है। अब जो चिंताजनक स्थिति उभरकर सामने आई है वह खरगोन जिले में स्थित जलूद से आई है। इंदौर में नर्मदा पेयजल योजना का इलेक्ट्रिक ग्रिड जलूद में ही स्थापित है। वहीं से नर्मदा पानी को पम्पिंग कर इंदौर के लिए भैजा जाता है। यही पानी इंदौरवासियों के वंâठ की प्यास को बुझाता है। अवैध उत्खनन करने वाले रेत माफिया ने नर्मदा के किनारों को छलनी करते-करते अपने कामकाज को इस इलेक्ट्रिक ग्रिड के ठीक पास तक पहुंचा दिया है। अब हालत यह हो गई है कि इस अवैध उत्खनन के कारण किसी भी दिन नर्मदा योजना का इलेक्ट्रिक ग्रिड पूरी तरह से धंस जाएगा।


इस स्थिति के बारे में पूछे जाने पर इंदौर नगर निगम की जलकार्य समिति के प्रभारी बलराम वर्मा ने बताया कि हालात कोई आज ही खराब नहीं हुए हैं, लगातार इस स्थान पर हो रहे अवैध उत्खनन ने इन हालातों को जन्म दिया है। इसके चलते हुए अब इलेक्ट्रिक ग्रिड के धंस जाने का खतरा बढ़ गया है। किसी भी दिन यह ग्रिड धंस जाएगा और इसके धंसने पर कम से कम १५ दिन के लिए शहर में पानी का सप्लाय पूरी तरह से बंद हो जाएगा। १५ दिन से कम समय में इस ग्रिड को वापस स्थापित कर पाना संभव नहीं हो पाएगा। ऐसी स्थिति में नर्मदा के जल प्रदाय के समक्ष एक बड़ी और गंभीर किस्म की चुनौती सामने आ गई है। उन्होंने बताया कि इस बारे में इंदौर नगर निगम की ओर से लगातार खरगोन के जिला प्रशासन को शिकायत की जा रही है। प्रशासन की ओर से इन शिकायतों को सुनकर अनसुना करने का काम किया जा रहा है। अब तक प्रशासन ने इस अवैध उत्खनन को रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए हैं। प्रशासन की यह स्थिति ही इंदौर के समक्ष पैैदा होती पानी की चुनौती को गंभीर कर रही है।


इंदौर के समक्ष पैदा हो रहे इस इतने बड़े गंभीर और संगीन खतरे से सभी नावाकिफ है। हालात तो इतने खराब है कि इंदौर नगर निगम के शरमाएदार भी इन मुद्दों से नजरें चुराते हुए नजर आते हैं। उनके मुंह से इन मामलों में बोल भी नहीं पूâटते हैं। जिस भी दिन यह इलेक्ट्रिक ग्रिड बैठ जाएगा उस दिन हालात को भुगतना तो इंदौर शहर के नागरिकों को पड़ेगा।


खरगोन में जो अवैध उत्खनन का गौरख धंधा चल रहा है उसके पीछे वहां के मजबूत और दमदार भाजपा के नेता है। इन नेताओं के द्वारा ही पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस धंधे को शुरू किया गया था और उसी समय शेशवकाल से शुरू हुआ यह धंधा परवान चढ़ता हुआ जो आगे बढ़ा तो फिर पीछे पलटकर देखने का नाम ही नहीं ले रहा है। अन्य जिलों के प्रशासन की तरह खरगोन का जिला प्रशासन भी इस पूरे मामले में धृतराष्ट्र बनने में कहीं कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।


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