नर्मदा नदी के संरक्षण से लेकर जीवित इकाई घोषित करने की कोशिश बेकार शिवराज के जाते ही योजना हुई बंद

नर्मदा नदी के संरक्षण से लेकर जीवित इकाई (लाइव एंटिटी) घोषित करने की कोशिशें बेकार साबित हुईं। विधानसभा में दो साल पहले संकल्प पारित करने के बाद भी राज्य सरकार कोई नियम तक नहीं बना सकी है। इस कारण न तो नर्मदा से रेत उत्खनन पर रोक लगी और न ही नर्मदा में औद्योगिक प्रदूषण, सीवेज मिलने से लेकर पूजन सामग्री फेंकने की सिलसिला थमा। हाई कोर्ट की रोक के बाद भी गणेशोत्सव और नवरात्रि में नर्मदा में न सिर्फ मूर्तियां बल्कि पूजन सामग्री भी विसर्जित की गई। इन सभी पर नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा के दौरान रोक लगाने की घोषणा की गई थी।


उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मार्च 2017 में गंगा और यमुना नदियों को जीवित इकाई का दर्जा देने का फैसला सुनाया था। इसके बाद किसी नदी को जीवित इकाई घोषित करने वाला राज्य मध्य प्रदेश था। तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के कहने पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा को जीवित इकाई घोषित करने की घोषणा की थी। सरकार ने तीन मई 2017 को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर यह संकल्प पारित कराया। सरकार ने इसके नियम बनाने की जिम्मेदारी मप्र राज्य जैव विविधता बोर्ड को सौंपी थी


बोर्ड ने इस पर काम भी शुरू कर दिया था, लेकिन विधानसभा चुनाव की जमावट के चक्कर में शिवराज सरकार इसे अंतिम रूप नहीं दे सकी। दिसंबर 2018 में सरकार बदल गई तो जिम्मेदार अफसरों से नर्मदा को जीवित इकाई घोषित करने की फाइल ही बंद कर दी। सूत्र बताते हैं कि वर्तमान में इस पर कोई काम नहीं किया जा रहा है।


पल्ला झाड़ रहे विभाग


 


पूर्ववर्ती सरकार इस तैयारी में थी कि नर्मदा की सेहत को खतरा पहुंचाने वालों के खिलाफ सजा जैसे सख्त प्रावधान किए जाएं। इस संबंध में विधानसभा में बाकायदा विधेयक लाकर इसे कानूनी जामा पहनाना था। विशेष सत्र बुलाकर संकल्प पारित करने के बाद शिवराज सरकार ने नियम बनाने की जिम्मेदारी मप्र राज्य जैव विविधता बोर्ड को सौंपी थी।


इसकी मॉनीटरिंग मप्र राज्य योजना आयोग को करना थी और पर्यावरण विभाग की देखरेख में सभी काम होने थे, लेकिन अब सभी पल्ला झाड़ रहे हैं। इस संबंध में मप्र जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव श्रीनिवास मूर्ति से बात की तो उन्होंने कृषि विभाग को जिम्मेदार बता दिया


मप्र राज्य योजना आयोग में पदस्थ एपीसीसीएफ मनोज अग्रवाल कहते हैं कि यह काम हमारे पास नहीं है। आर्थिक एवं योजना सांख्यिकी विभाग से बात करिए। आर्थिक एवं योजना सांख्यिकी विभाग के प्रभारी आयुक्त आरएस राठौर कहते हैं कि यह काम तो राज्य योजना आयोग का है। हमें इसकी जानकारी नहीं है। योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के उप सचिव जितेंद्र राजे से बात की गई तो उन्होंने कहा मैं इसे नहीं देखता।


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