समाज की कसौटी होती है साहित्य l

       समाज की कसौटी होती है साहित्य l



इंदौर।  शनिवार को इन्दौर लेखिका संघ ने इंदौर प्रेस क्लब में तमाम प्रशासनिक व्यस्तताओं के बावजूद, साहित्य सृजन, कैसे सम्भव? विषय पर चर्चा की गई, जिसमें एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे, एएसपी मनीषा पाठक सोनी व एयरपोर्ट डॉयरेक्टर अर्यमा सान्याल व इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने अपने विचार प्रकट किए। 
एएसपी प्रशांत चौबे ने कहा कि  साहित्य आदमी के खून में बहने वाला वह प्रवाह है जो उसे संवेदनशील बनाता है। साहित्य समाज की कसौटी है। 
एयरपोर्ट डॉयरेक्टर अर्यमा सान्याल ने  कहा कि मैंने 6 साल की उम्र से लिखना शुरू किया था। एयरपोर्ट मेरे जीवन में बाद में आया, कविता जीवन में पहले आई। इंदौर एयरपोर्ट को नगर राज्य भाषा समिति में प्रथम पुरस्कार मिला है।  एएसपी मनीषा सोनी पाठक ने कहा कि पाठक होना साहित्य सृजन की पहली शर्त होती है। मेरा मानना है कि महिला के पास ही सृजन की बहुत शक्ति व ताकत है। महिला की पूजा तभी है जब उसके पास शक्ति हो।  विनीता तिवारी ने कहा कि परिचर्चा का निष्कर्ष सिर्फ यही है, ना ही समय की व्यस्तता साहित्य सृजन को रोक पाएगी और ना ही पेशा मन की कोमल भावनाओं को आहत कर पाएगा।  मंजुला भूतड़ा ने अपना अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि साहित्य सृजन के लिए एक संवेदनशील मन चाहिए, सच तो यही है बात जो दिल से निकले वही खास होती है।