"शुद्ध के लिए युद्ध" अभियान से माफियाओं और उनके संरक्षकों में फैली घबराहट, आम जनता में कमलनाथ सरकार के प्रति जागा विश्वास का भाव*

*"शुद्ध के लिए युद्ध" अभियान से माफियाओं और उनके संरक्षकों में फैली घबराहट, आम जनता में कमलनाथ सरकार के प्रति जागा विश्वास का भाव*


*माफिया के विरुद्ध अभियान से केवल वही बिलबिला रहे हैं, जिनकी दुम पर कमलनाथ सरकार ने अपना पैर रख दिया है : शोभा ओझा*


मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने आज जारी अपने बयान में कहा कि कमलनाथ सरकार द्वारा समूचे प्रदेश में माफियाओं के विरुद्ध चलाए जा रहे निष्पक्ष और प्रभावी अभियान से भाजपा और उसके नेता बौखला गए हैं क्योंकि भाजपा के पिछले 15 वर्षों के जंगलराज के दौरान ही प्रदेश में भू-माफ़िया सहित रेत, खनिज, शिक्षा, चिकित्सा और मिलावट जैसे सभी प्रकार के माफिया पनपे थे। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का यह बयान कि "कमलनाथ सरकार भाजपा कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने का काम कर रही है", बिल्कुल बेबुनियाद और उनकी बौखलाहट व हताशा का प्रतीक है।


आज जारी अपने बयान में श्रीमती ओझा ने आगे कहा कि शिवराज सिंह, राकेश सिंह और कैलाश विजयवर्गीय द्वारा माफियाओं के विरुद्ध हो रही कमलनाथ सरकार की निर्णायक कार्रवाई के विरोध से, यह साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी के डेढ़ दशक लंबे जंगलराज में इतने बड़े पैमाने पर माफियाओं ने अपनी सल्तनतें आखिर कैसे खड़ी कीं और कौन लोग उनको संरक्षण दे रहे थे।


आज जारी अपने बयान में श्रीमती ओझा ने कहा कि इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर सहित अन्य शहरों में में भू-माफिया के विरुद्ध सख्त कार्यवाही के कारण जहां हजारों करोड़ रुपए की भूमि मुक्त हुई है, वहीं इन शहरों कोअतिक्रमण मुक्त करवाने में भी मदद मिली है और प्रदेश के पीड़ित नागरिकों के चेहरों पर एक मुस्कान भी खिली है लेकिन अगर कमलनाथ सरकार कि इस निष्पक्ष, जनहितैषी और लोकप्रिय कार्यवाही के विरुद्ध भी कुछ लोग खड़े हो गए हैं तो इसका साफ मतलब है कि उनके लिए प्रदेश की आम जनता के हितों से अधिक महत्वपूर्ण माफियाओं के हित हैं।


अपने बयान के अंत में श्रीमती ओझा ने कहा कि "शुद्ध के लिए युद्ध" के अपने अभियान के तहत कमलनाथ सरकार की कार्यवाहियों से जहां सभी तरह के माफ़ियाओं में घबराहट और हताशा का भाव है, वहीं आम जनता ने राहत और सुकून की सांस ली है। प्रदेश में माफिया के विरुद्ध इतने बड़े पैमाने पर चलाए गए इस ऐतिहासिक अभियान को मिले व्यापक जनसमर्थन के बाद केवल वही इससे बिलबिला रहे हैं, जिनकी दुम पर कमलनाथ सरकार ने अपना पैर रख दिया है।